स्त्री भी एक नदी सी है
स्त्री भी एक नदी सी है....
उसे अपने बहाव में बहने दो, वह सब जानती है कि कितने बहाव में बहना है, कब थमना है, कहाँ मुड़ना है.
अगर उसे बांधने की कोशिश की तो या तो वह अपनी दिशा बदल देगी या रौद्र रूप धारण कर लेगी क्योंकि उसे भी पता है कि वह कितनी भी विस्तृत हो जाये,मार्ग से अपने भटक जाये पर अंत में वह सागर से ही मिलेगी...
Pallavi Laghate
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